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ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी

ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी,
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी,
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत,
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी।

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smschacha 21 May 2015 at 11:55 PM  

Really Good And Touching Shayari On Mohabbat....

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