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धन से बेशक गरीब रहो

धन से बेशक गरीब रहो पर दिल से रहना धनवान,
धन से बेशक गरीब रहो पर दिल से रहना धनवान,
अक्सर झोपडी पे लिखा होता है सुस्वागतम,
और महल वाले लिखते है कुत्ते से सावधान।

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ज़रा गौर फरमाइये...

अर्ज़ किया है...
वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो,
ज़रा गौर फरमाइये...
वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो,
बड़ा ज़िद्दी है ये कमीना, पहले कुत्ते की तरह घसीटो।

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - मच्छर ने आपको काटा...

मच्छर ने आपको काटा, वो उसका जूनून था,
आपने खुजली की, वो आपका सुकून था,

चाहकर भी आपने उसे क्यों नहीं मारा ?
क्योकि उसके रगों में भी आपहीका खून था।

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - उनकी झुल्फो पे बहुत...

उनकी झुल्फो पे बहुत प्यार आया, 
उनकी झुल्फो पे बहुत प्यार आया, 

पास जाकर देखा तो सरदार पाया । 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - फूलों से खुबसूरत...

फूलों से खुबसूरत कोई नहीं,
सागर का गहरा कोई नहीं,

अब आपकी क्या तारीफ करू,
आपसे नालायक दोस्त कोई नहीं।

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - वो आज भी हमें देख कर...

वो आज भी हमें देख कर मुस्कुराते हैं,
वो आज भी हमें देख कर मुस्कुराते हैं,

ये तो उनके बच्चे ही कमीने हैं,
जो हमें मामा - मामा कहके बुलाते हैं। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - उनकी गली से हम...

उनकी गली से हम गुजरे, अजीब इत्तफाक था,
उनकी गली से हम गुजरे, अजीब इत्तफाक था,

फूल तो फेके उन्होंने, मगर गमले भी साथ था। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - जिंदगी में तुम...

जिंदगी में तुम बहुत आगे जाओगे,
जिंदगी में तुम बहुत आगे जाओगे,

क्योकि जहाँ भी तुम जाओगे,
लोग कहेंगे "चल - चल आगे जा"। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - जमाने के डर से...

जमाने के डर से उनकी तस्वीर बाथरूम में छुपा रखी हैं,
जमाने के डर से उनकी तस्वीर बाथरूम में छुपा रखी हैं,

दीदार हो उनका बार - बार, इसलिये जुलाब की गोली खा रखी हैं। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - तेरे दर पे सनम...

तेरे दर पे सनम, हजार बार आयेंगे,
तेरे दर पे सनम, हजार बार आयेंगे,

घंटी बजायेंगे, और भाग जायेंगे । 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - कोई पत्थर से न मारो...

कोई पत्थर से न मारो मेरे दीवाने को,
कोई पत्थर से न मारो मेरे दीवाने को,

न्यूक्लियर बम का ज़माना हैं, उरा दो साले को। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - तुमको देखा...

तुमको देखा, तुमको देखा,
तो ये ख़याल आया ....

पागलों के स्टॉक में,
फिर नया माल आया। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - मैं तुम्हारे लिये ...

मैं तुम्हारे लिये सब कुछ करता,
मगर मुझे थोरा काम था,

मैं तेरे लिये डूब मरता,
मगर मुझे जुखाम था। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - पत्थर क्यों मारते हो...

पत्थर क्यों मारते हो, पूरा पहाड़ मार दो,
पत्थर क्यों मारते हो, पूरा पहाड़ मार दो,

हम यूँ ही मर जायेंगे, बस एक बार आँख मार दो। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - सोचता था हर मोड़ पर..

सोचता था हर मोड़ पर आपका इंतज़ार करेंगे,
सोचता था हर मोड़ पर आपका इंतज़ार करेंगे,

पर क्या करे कमबख्त ये सड़क ही सीधा निकला। 

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Jhaji Uvach - झाजी उवाच - ग़म वो चीज हैं...

ग़म वो चीज हैं, 
वाह क्या दर्द हैं? 

ग़म वो चीज है,
जिससे पेपड़ चिपकाया जाता हैं। 

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