.....
Showing posts with label Mirza Ghalib Shayari. Show all posts
Showing posts with label Mirza Ghalib Shayari. Show all posts

वो नज़र झुका कर चले गए

सरे राह जो उनसे नज़र मिली,
तो नक़्श दिल के उभर गए;
हम नज़र मिला कर झिझक गए,
वो नज़र झुका कर चले गए।

Read more...

मुझे देखने से पहले साफ़ कर

मुझे देखने से पहले साफ़ कर​,
अपनी आँखों की पुतलियाँ ग़ालिब​,
कहीं ढक ना दे मेरी अच्छाइयों को भी​,
नज़रों की ये गन्दगी तेरी​।

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - कहते हुए साक़ी से हया आती है वर्ना

कहते हुए साक़ी से हया आती है वर्ना,
कहते हुए साक़ी से हया आती है वर्ना,

है यों, कि मुझको दुर्दे-तहे-ज़ाम बहुत है।
(दुर्दे-तहे-ज़ाम- शराब की प्यालियों में बची हुई शराब/तलछट)

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - वफा कैसी? कहाँ का इश्क?

वफा कैसी? कहाँ का इश्क? जब सर फोड़ना ठहरा,
वफा कैसी? कहाँ का इश्क? जब सर फोड़ना ठहरा,

तो फिर ऐ संगदिल! तेरा ही संगे-आस्तां क्यों?”
(संगदिल- पत्थरदिल/पाषाणहृदय, संगे-आस्तां- दहलीज का पत्थर/चौखट)

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया

इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया,
इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया,

वर्ना हम भी आदमी थे काम के।

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - खुशी से मेरे हाथ-पाँव फूल गये

‘असद’ खुशी से मेरे हाथ-पाँव फूल गये,
‘असद’ खुशी से मेरे हाथ-पाँव फूल गये,

कहा जो उसने, जरा मेरे पाँव दाब तो दे।
(‘असद’- ग़ालिब का पहले का नाम)

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - दाद इस जुनूने-शौक की देना

खुदा के वास्ते, दाद इस जुनूने-शौक की देना,
खुदा के वास्ते, दाद इस जुनूने-शौक की देना,

की उसके दर पे पहुँचते हैं, नामाबर से हम आगे।
(जुनूने-शौक- अभिलाषाओं का उन्माद, नामाबर- पत्रवाहक)

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - कासिद के आते-आते

कासिद के आते-आते खत इक और लिख रखूँ,
कासिद के आते-आते खत इक और लिख रखूँ,

मैं जानता हूँ, जो वो लिखेंगे जवाब में।
(कासिद- पत्रवाहक)

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - इस सादगी पे कौन न..

इस सादगी पे कौन न मर जाये, ऐ खुदा,
इस सादगी पे कौन न मर जाये, ऐ खुदा,

लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं।

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - मुद्दत हुई है यार को..

मुद्दत हुई है यार को मेहमां किये हुए
मुद्दत हुई है यार को मेहमां किये हुए

जोश-ए-कदह से बज़्म चिरागां किये हुए।
(मुद्दत- लम्बा समय, जोश-ए-कदह- मदिरा का उबाल, बज्म- महफिल, चिरागां- रौशन) 

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - जाते हुए कहते हो..

जाते हुए कहते हो, क़यामत को मिलेंगे
जाते हुए कहते हो, क़यामत को मिलेंगे

क्या खूब! क़यामत का है गोया कोई दिन और।
(कयामत- प्रलय, गोया- जैसे)

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - हमने माना कि तग़ाफुल..

हमने माना कि तग़ाफुल न करोगे, लेकिन
हमने माना कि तग़ाफुल न करोगे, लेकिन

ख़ाक हो जायेंगे हम, तुमको खबर होने तक।
(तगाफुल- उपेक्षा)

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - इश्क पे जोर नहीं...

इश्क पे जोर नहीं, है ये वो आतिश ग़ालिब,
इश्क पे जोर नहीं, है ये वो आतिश ग़ालिब,

कि लगाये न लगे और बुझाये न बने।
(आतिश- आग)

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - पीने दे शराब मस्जिद में..

पीने दे शराब मस्जिद में बैठ के ग़ालिब,
पीने दे शराब मस्जिद में बैठ के ग़ालिब,

या वो जगह बता, जहाँ खुदा नहीं हैं।

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - इस कदर तोरा हैं मुझे...

इस कदर तोरा हैं मुझे, उसकी बेवफाई ने इसरर,
इस कदर तोरा हैं मुझेउसकी बेवफाई ने इसरर,

अब कोई प्यार से भी देखे तो बिखर जाता हूँ मैं।

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - कितना खौफ होता हैं...

कितना खौफ होता हैं शाम के अंधेरो में,
कितना खौफ होता हैं शाम के अंधेरो में,

पूछो उन परिंदो से, जिनका घर नहीं होता।

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - लाल दिवार पर...

लाल दिवार पर ग़ालिब ने लिखा हैं,
लाल दिवार पर ग़ालिब ने लिखा हैं,

इस दीवार पर कुछ भी लिखना मना हैं।

Read more...

Mirza Ghalib Shayari - कपड़े बदल - बदल कर..

कपड़े बदल - बदल कर क्या भरोसा है जिंदगानी का,
कपड़े बदल - बदल कर क्या भरोसा है जिंदगानी का,

इंसान बुल-बुला हैं पानी का, जी रहे है कपड़े बदल - बदल कर,
एक दिन, एक कपड़े में ले जायेंगे लोग कंधे बदल - बदल कर।

Read more...
Please like this website on facebook

फेसबुक उपयोगकर्ता के लिए टिप्पणी करने हेतु आसान टिप्पणी बॉक्स

  © World Of Hindi Shayari. All rights reserved. Blog Design By: Jitmohan Jha (Jitu)

Back to TOP